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|| इक ओंकार सतनाम करता पुरख ||

Guru Nanak Ji

|| इक ओंकार ||

 

Guru Nanak Ji

 

इक ओंकार सतनाम करता पुरख
निर्मोह निर्वैर अकाल मूरत
अजूनी सभम
गुरु परसाद जप आड़ सच जुगाड़ सच
है भी सच नानक होसे भी सच
सोचे सोच न हो वे
जो सोची लाख वार
छुपे छुप न होवै

 

जे लाइ हर लख्तार
उखिया पुख न उतरी
जे बनना पूरिया पार
सहास्यांपा लाख वह है
ता एक न चले नाल
के वे सच यारा होइ ऐ
के वे कूड़े टूटते पाल
हुकुम रजाई चलना नानक लिखिए नाल

 

 

 

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